गैंगरेप के दुष्कर्मी भाजपा नेता को बचाने में जुटी भाजपा सरकार

October 20, 2016 Shivpal Gurjar Luhari No comments exist

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SHIV PANDEY

महासमुंद में महिला को जबरन उसके घर के बाहर से उठाकर कार में डालने, गैंगरेप करने, और प्राइवेट पार्ट में रॉड डालने और पूरी वारदात का वीडियो बनाने वाले भारतीय जनता युवा मोर्चा के पदाधिकारी प्रिंस सलूजा को बचाने में पूरी प्रदेश भाजपा जुट गई है।

सबसे पहले तो पीड़ित की शिकायत के बावजूद भाजपा नेता जसवंत सलूजा के बेटे और मुख्य आरोपी चरणजीत सिंह उर्फ प्रिंस सलूजा का नाम ही पुलिस ने एफआईआर में दर्ज नहीं किया। बाद में राजनीतिक हो-हल्ला ज्यादा मचने पर उसका नाम जोड़ा गया। घटना के छह दिन तक उसे फरार बताकर गिरफ्तार नहीं किया। आखिरकार, ओडीशा भागते समय वहशी दरिंदा प्रिंस सलूजा पकड़ा गया, तो अब सरकारी स्तर पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश हो रही है।

पीड़ित महिला गैंगरेप की वारदात के बाद अगले दिन लोगों को बेहोश और बुरी तरह से घायल हालत में मिली थी। बाद में उसकी स्थिति कुछ ठीक होने पर 14 तारीख को उसने रिपोर्ट लिखाई। महिला अपने मायके आई थी, तभी दरिंदे प्रिंस सलूजा की निगाह उस पर पड़ गई। पिछले कई दिनों से वह उसके पीछे पड़ा था, और आखिरकार 11 तारीख को वह कामयाब हो ही गया।

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खुद मुख्यमंत्री अब कह रहे हैं कि आरोपी गिरफ्तार हो गया इसलिए अब शोरगुल करने की जरूरत नहीं। इतना ही नहीं, वे रेपिस्ट की जाति भी छिपाने में लगे हैं। रमन सिंह ने साफ कह दिया है कि रेपिस्ट की कोई जाति नहीं होती।

उधर पुलिस भी कम नहीं है। बसना के टीआई ने घोर लापरवाही बरतते हुए दुष्कर्म पीड़िता और मुख्य गवाह की पहचान सोशल मीडिया में वायरल कर दी। हालाँकि, ये पीड़ित पर दबाव बनाने के लिए जान-बूझकर की गई हरकत मानी जा रही है। टीआई नरेंद्र यादव ने रविवार की रात 10.37 बजे यह पहचान अपने मोबाइल नं 9754470625 के जरिए उजागर की। भारतीय दंड संहिता की धारा 228 ए का उल्लंघन ने मामले में पुलिस की भूमिका को एकबार फिर संदिग्ध बना दिया है।

कानून के प्रावधानों के मुताबिक यह गंभीर श्रेणी का अपराध है। मामले में छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए टीआई के खिलाफ कार्रवाई मांगी है। हालांकि टीआई यादव अब सफाई देते हुए इसे मानवीय त्रुटि बता रहे हैं वहीं एडिशनल एसपी राकेश भट्ट ने कहा कि पीड़िता की पहचान उजागर नहीं करना चाहिए था। उसे स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मामले में दो आरोपी फरीद अली खान और देवेंद्र चौधरी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस ने बताया कि मामले में पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण करवाने के बाद जांच में मिले तथ्यों के आधार पर एससीएसटी एक्ट की धारा 3(1) 12 के तहत भी कार्रवाई की गई है।
दूसरी तरफ लोग यह भी कह रहे हैं कि प्रिंस सलूजा सत्ता के नशे में ऐसी घटनाओं में पहले भी लिप्त रहा है। वारदात करने का जो उसका तरीका है, उससे लगता है कि वह कई महिलाओं के साथ पहले भी ऐसी हरकतें कर चुका है, और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर उनका मुंह बंद किए है। लोगों की मांग है कि उसके साथ कड़ाई से पूछताछ की जाए, तो वह अन्य वारदातें कबूल कर सकता है।

शिव पाण्डेय
प्रभारी
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी
सोशल मीडिया

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