दल-बदल के मौसम में खाबरी ने पार्टी छोड़ते ही बदला सुर, बसपा सुप्रीमो पर लगाई आरोपों की झड़ी

October 13, 2016 Shivpal Gurjar Luhari No comments exist

images

BRIJLAL KABRI

रविवार को अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम में पूर्व सांसद और एक समय मायावती के दाहिने हाथ के तौर पर गिने जाने वाले बृजलाल खाबरी ने बसपा छोड़कर नई दिल्ली में 24 अकबर रोड पर कांग्रेस की सदस्यता स्वीकार करने की घोषणा कर दी है। बृजलाल खाबरी के इस फैसले को मनोवैज्ञानिक तौर पर बसपा सुप्रीमों मायावती के लिए ऐसे समय जबर्दस्त झटका माना जा रहा है जब हर रोज एक न एक प्रमुख नेता का उनकी पार्टी छोड़ने का तांता लगा हुआ है।

ध्यान रहे कि 1996 में जब बसपा सुप्रीमों ने पार्टी की सारी कार्यकारी शक्तियां मान्यवर कांशीराम के हाथों से अपने कब्जे में करने की शुरूआत की थी उस समय उन्होंने कांशीराम के बामसेफ के जमाने के निकट सहयोगी डॉ. रामाधीन को बाहर का रास्ता दिखाकर उन्ही के शिष्य रहे बृजलाल खाबरी को जालौन में संगठन का जिलाध्यक्ष बनाकर इस जिले में रातों-रात पार्टी के सर्वेसर्वा के तौर पर स्थापित कर दिया था। इसके बाद जिले की राजनीति में ही नही समूचे बुंदेलखंड के लिए बृजलाल खाबरी मायावती के नाक-कान बन गये और उनके कहने से पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीराम पाल, अकबर अली जैसे दिग्गजों को पार्टी से बाहर कर दिया गया था और मिशनरी दलित नेता व चुनाव में पार्टी की पहली बोहनी कराने वाले चैनसुख भारती का भी टिकट काट दिया गया था।

इस उठापटक में बृजलाल खाबरी मायावती को शुरूआती दौर में इस कदर फले कि उनकी बदौलत 1999 के लोकसभा चुनाव में यह संसदीय सीट पहली बार बसपा की झोली में आ गई। मायावती ने उन्हें दूसरे कई राज्यों में पार्टी का प्रभारी बनाया। उन्हें पार्टी में नंबर सेकेंड तक माना जाने लगा था लेकिन 2007 में मायावती का मूड उनके प्रति इस कदर बदला कि उन्होंने विधानसभा चुनाव के ऐन पहले बेआबरू करके उन्हें पार्टी से बाहर ही नही कर दिया बल्कि यह तक घोषणा कर दी कि अगर वे नाक भी रगड़ेंगे तो उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल नही किया जायेगा।

खाबरी को इसके बाद कुछ वर्ष तक भीषण दुर्दिनों का सामना करना पड़ा। उनके खिलाफ बसपा सरकार में वन कर्मियों पर हमले तक का मुकदमा कायम हो गया जिसमें उनकी गिरफ्तारी के आदेश भी कर दिये गये। इसके बावजूद खाबरी ने दूसरी पार्टी में जाना गंवारा नही किया। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में उनके विकल्प के रूप में लाये गये तिलक चंद्र अहिरवार जब कामयाब नही हो पाये तो मायावती ने एक बार फिर बृजलाल खाबरी को अपना लिया। न केवल इतना बल्कि मायावती ने उनको पूरे 6 वर्ष के लिए राज्यसभा में पहुंचा दिया। इसके बाद खाबरी ने चुन-चुन कर उन लोगों को सबक सिखाया जिन्होंने मायावती के आदेश के अनुपालन में उनसे दूरी बनाने का दुस्साहस किया था।

2012 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की सत्ता से बेदखली के बाद भी खाबरी की जालौन जिले के मामले में पार्टी के अंदर चलती रही लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में जब वे भी पराजित हो गये तो मायावती के दरबार में उनकी उल्टी गिनती का दौर फिर शुरू हो गया। उन्हें जिले और बुंदेलखंड की राजनीति से बदर कर दिया गया और तिलक चंद्र अहिरवार को फिर झांसी मंडल में पार्टी का सर्वेसर्वा बना दिया गया। यही नही आगे चलकर उन्हें गालियां देने वाले पंकज अहिरवार को उरई विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का उम्मीदवार बनाकर 2012 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार रहे खाबरी के साले श्रीपाल का पत्ता साफ कर दिया गया। छटपटाये खाबरी ने विधानसभा चुनाव का समय आने तक मायावती की नजदीकी फिर हासिल करने की भरपूर कोशिश की लेकिन उनकी दाल नही गल पाई। इस बीच कांग्रेस में उनके तार स्थानीय राजनीति के समीकरणों के तहत काफी पहले से जुड़े हुए थे। जिसकी वजह से आखिर उन्हें हृदय परिवर्तन के लिए तैयार कर लिया गया और इसके तहत आज उन्होने 24 अकबर रोड दिल्ली स्थित कांग्रेस के राष्ट्रीय मुख्यालय पर गुलाम नवी आजाद, राज बब्बर और संजय सिंह के सामने कांग्रेस की सदस्यता स्वीकार करने की घोषणा कर दी।

बृजलाल खाबरी के साथ राठ विधानसभा क्षेत्र से तीन बार बसपा के एमएलए और प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्य रहे धूराम चौधरी ने भी कांग्रेस की सदस्यता स्वीकार कर ली है।

एआईसीसी के प्रवक्ता पैनल में खाबरी का नाम शामिल किये जाने का संकेत

बृजलाल खाबरी को एआईसीसी में पार्टी के प्रवक्ताओं की सूची में शामिल किया जा सकता है। इसका संकेत गुलाम नवी आजाद ने पत्रकार वार्ता में दिया। कांग्रेस की योजना शायद यूपी विधानसभा चुनाव के मददे नजर दलितों में उनके माध्यम् से मायावती की प्रभावी काट करने की है।

उन्होंने कहा कि बृजलाल खाबरी उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में बड़ा चेहरा हैं। उन्होंने कहा कि खाबरी आज से ही कांग्रेस का काम शुरू कर देंगे। खाबरी ने भी पत्रकारों से कहा कि वे आज के अलावा अब नियमित रूप से पार्टी के कहने पर आप लोगों से बातचीत करते रहेंगे।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर ने खाबरी को बड़ा नेता बताते हुए कहा कि पार्टी के हर फोरम पर उन्हें पूरा सम्मान दिया जायेगा। खाबरी कांग्रेस पार्टी में शीर्ष नेताओं से मिले इस वैलकम से काफी उत्साहित नजर आये।

गुलाम नवी आजाद यह बताना नही भूले कि बृजलाल खाबरी के पास इस समय बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव का पद है। उन्होंने कहा कि बृजलाल खाबरी की उत्तर प्रदेश में ही नही पूरे देश में मजबूत पहचान है क्योंकि खाबरी मध्य प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, झारखंड आदि राज्यों में बहुजन समाज पार्टी के इंचार्ज का रोल निभा चुके हैं।

खाबरी ने भी कहा टिकट बेंचती हैं बहनजी, स्वामी प्रसाद मौर्य के आरोपों को सही ठहराया

बहुजन समाज पार्टी छोड़ते ही पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी ने भी मायावती के खिलाफ अन्य बागी नेताओं की तरह ही राग अलापा। उन्होंने कहा कि मायावती द्वारा पार्टी के टिकटों की नीलामी करने का स्वामी प्रसाद मौर्य का आरोप सही है।

खाबरी ने कहा कि उन्होंने भी बहनजी को उम्मीदवार बनवाने के बदले लोगों से कैश दिलवाया है। खाबरी ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी में कोई ऐसा नही है जो इस मामले में अपवाद हो।

खाबरी ने यह जताया कि बहुजन समाज पार्टी में उनकी आस्था मायावती की वजह से नही मान्यवर कांशीराम के कारण थी। छात्र राजनीति में वे कांशीराम के संपर्क में आ गये थे। उनके प्रेरित करने से ही वे सामाजिक बदलाव के मिशन को पूरा करने के लिए मुख्यधारा की राजनीति में जुड़े थे। उन्होंने मायावती पर कांशीराम के मिशन और विचारधारा से विश्वासघात करने का आरोप लगाया।

मायावती के खिलाफ जबर्दस्त विषवमन करते हुए बृजलाल खाबरी ने कहा कि वे संवेदनहीन है। पार्टी के किसी नेता के साथ कितनी भी बड़ी घटना हो जाये उन्हें संवेदना के लिए फोन तक गंवारा नही होता। उन्होंने मायावती पर दलितों की आकांक्षा के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है।

एक और पार्टी के क्षेत्रीय मठाधीश भी कांग्रेस की ओर कर सकते हैं रुख

बृजलाल खाबरी के बाद यूपी के राजनीति के बुंदेलखंड में एक और महत्वपूर्ण पार्टी के मठाधीश द्वारा भी कांग्रेस की ओर रुख किये जाने की चर्चाएं चल पड़ी हैं।

विधानसभा चुनाव के पहले बुंदेलखंड में सभी प्रमुख पार्टियों के अंदर जिस तरह से हलचल मची है उसके मददेनजर अटकलों का बाजार गर्म होता जा रहा है। प्रदेश की प्रमुख प्रतिद्वंदी पार्टियों में जालौन जिले के नेताओं को अहम् स्थान दिया गया था लेकिन पार्टी प्रमुखों के इन दत्तक पुत्रों को तिनके से वट वृक्ष में बदलने के बाद अनुशासन के नाम पर चुप रहना गंवारा नही रहा है।

इन नेताओं में पार्टी हाईकमान के सामने खड़े होने की जुर्रत आ चुकी है। इसकी पहली चुनौती से बसपा सुप्रीमों को रूबरू होना पड़ा है। अब बारी उसकी प्रतिद्वंदी पार्टी की बताई जा रही है। जालौन जिले की राजनीति के स्थानीय समीकरणों से वाकिफ लोग इन अटकलों में गंभीरता मान रहे हैं।

शिव पाण्डेय
प्रभारी
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी
सोशल मीडिया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *